Bihar News: Pashupati Paras Role In Shivchandra Ram Vs Chirag Paswan Hajipu Lok Sabha Election 2024 – Amar Ujala Hindi News Live

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Bihar News:  pashupati paras role in shivchandra ram vs chirag paswan Hajipu Lok Sabha Election 2024

पशुपति पारस का नंबर भी बढ़ेगा या घटेगा। समय शुरू हो रहा है अब…
– फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार


समय शुरू हो रहा है अब…! लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में बिहार की जिन पांच सीटों पर सोमवार सुबह मतदान होने जा रहा है, उसमें बगैर चुनावी मैदान में उतरे एक पूर्व केंद्रीय मंत्री की परीक्षा का समय शुरू हो रहा है। जी हां, यह हैं पशुपति कुमार पारस। दिवंगत राम विलास पासवान की बनाई लोक जनशक्ति पार्टी को दो फाड़ कर लोजपा (राष्ट्रीय) का खेमा संभालने वाले पशुपति कुमार पारस इस लोकसभा चुनाव में नहीं उतरे हैं। लेकिन, सोमवार को मतदान के बाद उनकी भी किस्मत एक तरह से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में बंद हो जाएगी। वह यहां के मौजूदा सांसद हैं और इस बार चुनाव में उतरे भी नहीं है, फिर भी। इस बार उनके भतीजे और लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान यहां से चुनाव में उतरे हैं। सामने राष्ट्रीय जनता दल के दिग्गज पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम हैं। सामने भले शिवचंद्र हैं, लेकिन असल यही देखना है कि पशुपति कुमार पारस भतीजे हो जिताने में भूमिका निभाते हैं या हराने में। जिताने में रहे तो फायदे में रह सकते हैं, हराने में दिखे तो नुकसान पक्का है। 

क्यों पारस की इतनी चर्चा है

पशुपति कुमार पारस इस सीट पर 2019 में दो लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीते थे। हारने वाले यही शिवचंद्र राम थे। यह सीट दिवंगत रामविलास पासवान की थी और उनके बाद यहां से पशुपति कुमार पारस ने कमान संभाल रखी थी। चिराग पासवान जमुई से पिछली बार सांसद बने थे। पिता के निधन के बाद चिराग हाजीपुर संसदीय क्षेत्र से खुद को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का निर्विरोध प्रत्याशी मान रहे थे। लेकिन, चाचा पारस यह सीट छोड़ने को राजी नहीं थे। इस जिद में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली मौजूदा केंद्र सरकार के मंत्री पद से भी इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने के बाद हर तरफ संभावना टटोलकर जब पारस ने खाली हाथ एनडीए में वापसी की तो उन्हें चुनाव लड़ने के लिए कोई सीट यहां भी नहीं मिली। अब हाजीपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक चिराग पासवान के प्रति अपना भाव जता चुके हैं। इससे पहले पशुपति पारस यह बता चुके हैं कि वह एनडीए के प्रत्याशियों के लिए प्रचार में जी-जान से जुटे हैं। लेकिन, सवाल हाजीपुर का है। दिवंगत रामविलास पासवान को रिकॉर्ड मतों से जिताने के बाद पारस को भी दो लाख के अंतर से जिताने वाला हाजीपुर अगर चिराग का साथ देने में कोताही बरतता नजर आता है तो उंगली मौजूदा सांसद पारस पर उठेगी ही उठेगी। मतलब, सोमवार को मतदान भले चिराग पासवान और शिव चंद्र राम के नाम पर हो, लेकिन अग्निपरीक्षा तो पारस की भी होगी। 

चिराग के खिलाफ चौतरफा घेराबंदी

चिराग पासवान को उनके परिवार की पारंपरिक सीट से हराने की चाहत सिर्फ सामने वाले महागठबंधन में ही नहीं, कुछ अपने भी इस अभियान में जुटे हैं। धीरे-धीरे उन अपनों की पहचान उजागर भी हो चुकी है। फिर भी चिराग को एहसास है कि कहीं-न-कहीं कुछ फांस गले में अटकी हुई है। यह फांस लोक जनशक्ति पार्टी (एकीकृत रहे) के कुछ नेताओं से है, यह भी चिराग को पता है। इसलिए, वह इसपर काम कर रहे हैं। दरअसल, चिराग को हराकर महागठबंधन की कमान संभालने वाले तेजस्वी यादव भी बिहार में अपनी उम्र का कोई नया चेहरा खड़ा होने से रोकना चाहते हैं। वैशाली सीट पर मुन्ना शुक्ला के लिए दांव खेलने की एक वजह यह भी है। शुक्ला इस दिशा में काम भी कर रहे हैं। वैशाली की तरफ से मुन्ना शुक्ला ने शिवचंद्र राम के लिए कमान संभाल रखी है तो सारण और दियारा इलाके से लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार चिराग को समेटने की जद्दोजहद में ताकत झोंके बैठा है। मतलब, चिराग की डगर को कठिन करने के लिए पूरा बंदोबस्त है- अंदर भी और बाहर भी। ऐसे में पशुपति कुमार पारस और प्रिंस राज सोमवार को हाजीपुर में अपने समर्थकों को मतदान केंद्र तक लाते है या नहीं, उससे राजग के अंदर इनका भविष्य तय हो जाएगा। दो लाख से जीते मौजूदा सांसद हैं चाचा पारस।



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